गझल

सुनेत्रा सुभाष - ⏱ १ मिनिट

खोल  गम्भीर  नाद
 मम  आत्म्याची  साद


मनी  मम  सुन्दर  जे
त्याचा  तू  अनुवाद


गझल  म्हणू  की  ग़ज़ल
नको  फुकाचा  वाद


घे  जुळवुन  पण  प्राण
करू  नको  बरबाद


कविता  वाटे  परी
तू  कोमल  परिझाद


मी  जरी  घन  घंटा
तू  तर  घंटा  नाद


तरल  धवल  हो  ऊड
जगणे  मजवर  लाद

गझल