कहाणी

सुनेत्रा सुभाष - ⏱ १ मिनिट

कसे  बोलू  जुने  सारे  मला  ते  आठवेनारे
कसे  गाऊ  तसे  गाणे  मला  ते  गाववेनारे


पुन्हा  गोष्टी   पुन्हा  गीते  कशाला  चन्द्र  हा  उगवे?
उशाला  चांदणे  गंधीत  ते ही  प्राशवेनारे


कशाला  बोलणे  काही  कळावे  अर्थ  श्वासांचे
उन्हाने  केतकी  फुलली  झळा  या  सोसवेनारे


कुणाला  सांगते  कोणी  मनोरा  कोसळे  कैसा
निळ्या  उध्वस्त  स्वप्नांचे  ढिगारे  पाहवेनारे


मुक्याने  माळला  चाफा  कसा  हा  गंधही  रुसला
कहाणी  लांबली  इतुकी  मला  ते  साहवेनारे

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