संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| उत्तर | अमोल शिरसाट | |
| वेळिअवेळी | क्रान्ति | |
| मारला गेलो | कैलास | |
| ... तुरुंग सारे! | गिरीश कुलकर्णी | |
| मराठी गझल | संतोष कुलकर्णी | |
| ..प्राण नाही | संतोष कुलकर्णी | |
| मात्रा | क्रान्ति | |
| माझाच व्हावा मला नित्य आधार | अजय अनंत जोशी | |
| वाटले सरली प्रतिक्षा... | अजय अनंत जोशी | |
| ह्या मनाचे, दुश्मनाचे काय करावे ?.... | खलिश | |
| वाणी | क्रान्ति | |
| उपाशी | कैलास | |
| सध्या! | मधुघट | |
| कंटाळा यावा इतका उत्साह कुणाला आहे? | बेफिकीर | |
| नाटकी | गिरीश कुलकर्णी | |
| पंढरी | मिल्या | |
| इतके दव त्या रस्त्यावरती पडले होते... | ज्ञानेश. | |
| कशी अंकुरावीत आता बियाणे? | गंगाधर मुटे | |
| मोजकी उन्हे , मोजक्या सरी | वैभव जोशी | |
| आपले म्हणून जा..कधीतरी | मानस६ |