संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| रांगले होते | अनिल रत्नाकर | |
| कवी | ऋत्विक फाटक | |
| बोलणे माझे ... | अजय अनंत जोशी | |
| गप्प नसती लोक काही नेमके पाहूनही | सोनाली जोशी | |
| जशा कैक होत्या व्यथा गोंदलेल्या | श्यामली | |
| ..... पुन्हा पुन्हा ! | जयश्री अंबासकर | |
| मी क्धी ना अड्वले | अनिल रत्नाकर | |
| हात माझे फुलांनी ही पोळले होते..... | खलिश | |
| भक्तीविभोर....!! | गंगाधर मुटे | |
| भेटत राहू | केदार पाटणकर | |
| काही वेळा..... | बेफिकीर | |
| इथे असतीस तर तू..... | बेफिकीर | |
| तुझ्या येण्यामुळे | अजय अनंत जोशी | |
| संताप | काव्यरसिक | |
| पेटतो सोहळा... | अजय अनंत जोशी | |
| खुशाली | आनंदयात्री | |
| प्राक्तन फ़िदाच झाले | गंगाधर मुटे | |
| मॄत्यू अर्धविरामावस्था | अनंत ढवळे | |
| काव्य जगावे | क्रान्ति | |
| रस्ता भरलेला असतो अन गर्दी साचत असते | सोनाली जोशी |