संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| तू कधी ही न रागावली पाहिजे | कैलास | |
| दु:ख माझे सोबती ! | प्रशान्त वेळापुरे | |
| हरवलाच रुखवती उखाण्याचा गोडवा | ह बा | |
| हा जुगार | केदार पाटणकर | |
| हेच असावे सत्य... | अजय अनंत जोशी | |
| थवा | मनीषा साधू | |
| तरी समुद्रा तुझ्या किनारी | बेफिकीर | |
| पाय ओढायला जडतात ती! | ह बा | |
| उधाणलेला समुद्र.... | जनार्दन केशव म्हात्रे | |
| दुःखे | योगेश्वर रच्चा | |
| निखारे | योगेश्वर रच्चा | |
| दूरचा किनारा | योगेश्वर रच्चा | |
| तुकारामा.. | रुपेश देशमुख | |
| त्यांनी..... | अमित वाघ | |
| पाखरे खाऊन गेली चाळलेल्या वेदना | ह बा | |
| 'चुकलो' म्हणेन मी तर सोकावतील सारे | चक्रपाणि | |
| गझल : प्रा.रुपेश देशमुख | रुपेश देशमुख | |
| का सूर नवा हा छेडत जाते भासांची वीणा ? | सोनाली जोशी | |
| नाचली काळीज ते पेलीत काही माणसे | ह बा | |
| तळ | मिलिन्द हिवराले |