संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| आज अचानक तुझी आठवण का यावी | अनिरुद्ध अभ्यंकर | |
| वाटते बोलायचे राहून गेले | कैलास | |
| गझलेत काय सांगू? | बहर | |
| घट अमृताचा | गंगाधर मुटे | |
| किती सुखाचे असेल | क्रान्ति | |
| सौदा | आनंदयात्री | |
| अंगार चित्तवेधी | गंगाधर मुटे | |
| पेटले सोयी प्रमाणे आणि नंतर गार झाले... | कैलास गांधी | |
| प्रश्न हा फिजूल आहे शब्द हे बेचव कसे... | कैलास गांधी | |
| कळले मलाच नाही | अवधुत | |
| एक उदासी खोलीभर.. | ज्ञानेश. | |
| श्वास | प्रसाद लिमये | |
| नशेत होतो मी ! | मानस६ | |
| ती इतकी करारी वाटते | निलेश कालुवाला | |
| जुने पेच ते..... | बहर | |
| सत्ते तुझ्या चवीने | गंगाधर मुटे | |
| जाणिवा विसरून गेलो ..... | ह बा | |
| करणार आहे | आदित्य_देवधर | |
| '' बरे दिसत नाही '' | कैलास | |
| '' तीळ '' | कैलास |