संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| भीती | अनिल रत्नाकर | |
| जगून घे | आदित्य_देवधर | |
| ... या नभी अंधारवेना | अजय अनंत जोशी | |
| हे खेळ संचिताचे .....! | गंगाधर मुटे | |
| '' प्रश्न'' | कैलास | |
| वंचना | आसावरी | |
| नास्तिक...! | काव्यरसिक | |
| बंडखोरी | क्रान्ति | |
| ती जुनी वही दिसली खिळखिळली माझी | चित्तरंजन भट | |
| समिकरणे | क्रान्ति | |
| '' धर्म '' | कैलास | |
| ठेच | योगेश वैद्य | |
| बदललास तू सहजच रस्ता आता तो सवयीचा झाला | कैलास गांधी | |
| कैफ त्या डोळ्यातला... | बहर | |
| निराशा | आदित्य_देवधर | |
| स्मशानात जागा हवी तेवढी | गंगाधर मुटे | |
| जीवना माझ्या बरोबर चालतांना | स्नेहदर्शन | |
| ही माणसे घनदाट देवासारखी | निलेश कालुवाला | |
| जाळीत फक्त जगणे | अवधुत | |
| कणसूर | विसुनाना |