संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
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| सूर्य माझ्या मागुनी येणार होता | कैलास गांधी | |
| सुखाच्या सर्व व्याख्यांना जरा बदलून पाहू या! | बहर | |
| तिथे ये पहाटे... | ह बा | |
| कुंडलीने घात केला | गंगाधर मुटे | |
| उगीच का प्राण.... | अजय अनंत जोशी | |
| ठेवणीतल्या आठवणींना.... | प्रदीप कुलकर्णी | |
| हा शब्दांच्या गुणसूत्रांचा दोष असावा | अनिरुद्ध अभ्यंकर | |
| पापणी अद्याप माझी... | केदार पाटणकर | |
| चालतो ऐसा जणू .... | ह बा | |
| पराक्रमी असा मी | गंगाधर मुटे | |
| '' कैलास '' | कैलास | |
| '' शेवटी '' | कैलास | |
| शंकर रामाणींची गझल | जयन्ता५२ | |
| माझ्या मनात थोडे... | केदार पाटणकर | |
| ती स्वप्नसुंदरी | गंगाधर मुटे | |
| टोचले होते.. | अजय अनंत जोशी | |
| प्रदेश... | प्रदीप कुलकर्णी | |
| कधी स्वतःच्या ... | अजय अनंत जोशी | |
| गोचिडांची मौजमस्ती | गंगाधर मुटे | |
| इतकी सुंदर ढाल? | ह बा |