संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| स्वीकार आशयाची | भूषण कटककर | |
| पुन्हा | क्रान्ति | |
| किती स्तब्धता ही प्रवाही अताशा | भूषण कटककर | |
| हे तेच ते दिनरात.. | केदार पाटणकर | |
| जरा गर्दी जमेपर्यंत........ | भूषण कटककर | |
| तू जरा समजून घे | प्रज्ञा महाजन | |
| आयुष्या | जगदिश | |
| विठू | क्रान्ति | |
| गलका ! | प्रदीप कुलकर्णी | |
| जायचे आहे कुठे पण? | भूषण कटककर | |
| असाच कधी | शगुन | |
| फुलानां स्वप्नात ही काटे बोचले ..... | खलिश | |
| ह्या कशा उबदार ओळी... | वैभव जोशी | |
| शिक्षा | क्रान्ति | |
| आता माझी एक ओळही मलाच भावत नाही | भूषण कटककर | |
| बहरली मनाची कधी बाग साधी ? | खलिश | |
| असे पाण्यामुळे गंगा | अजय अनंत जोशी | |
| चाचणी | व्यवस्थापक | |
| विसावा | जगदिश | |
| आजही स्मरणात सारे | जगदिश |