संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| संपेन मी नावानिशी..... | बेफिकीर | |
| मी मिटून डोळे कविता जागत असतो | चित्तरंजन भट | |
| मला वेळ नाही | अलखनिरंजन | |
| चाललो निघून मी | केदार पाटणकर | |
| हास आयुष्या | क्रान्ति | |
| आहे मीही... | मधुघट | |
| गातो तुझेच गाणे | मिल्या | |
| मी मोकळा | अलखनिरंजन | |
| हवे मधे किती छान गारवा होता..... | खलिश | |
| दवबिंदू | योगेश्वर रच्चा | |
| कुठे तरी काही तरी जळत होते ..... | खलिश | |
| तुझी ही बेफिकीरी 'बेफिकिर' थांबेल त्यावेळी | भूषण कटककर | |
| झालास 'बेफिकिर' तू काहीतरीच आता | भूषण कटककर | |
| असाच विस्कळीत मी | भूषण कटककर | |
| करून झाले | क्रान्ति | |
| दुःख गोठलेले मी... ! | प्रदीप कुलकर्णी | |
| कचरा | अलखनिरंजन | |
| आयुष्य तेच आहे - या मक्त्यावर आधारित | अलखनिरंजन | |
| फुलांना दंश काट्यांचे हवे होते..... | खलिश | |
| मी शशीची कोर व्हावे | भूषण कटककर |