संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| हुंदका साधा तुझा सांगून गेला | सोनाली जोशी | |
| मद्यालय | भूषण कटककर | |
| नवे ऋतू | क्रान्ति | |
| माझ्या मनासी कळेना | हरीश दांगट | |
| इथे तर पानगळ बहरात आहे | जयन्ता५२ | |
| ग झ ल : ७ (अ) : दुरूस्त आणी पुनः संपादित : मला तो का वियोगाची व्यथा देतो ? | खलिश | |
| आरपार | भूषण कटककर | |
| संपत नाही | केदार पाटणकर | |
| गझल : मी तुझ्या प्रेमात आहे, तू मला ही प्रेम कर...... | खलिश | |
| ग झ ल : मला का तो वियोगाची व्यथा देतो ? | खलिश | |
| कसे झाले? | क्रान्ति | |
| साकी मला तू असा, गळका जाम देऊ नको | खलिश | |
| गझल - ६.(ब) : साकी मला तू असा, गळका जाम देऊ नको : दुरूस्त आणी पुनः संपादित | खलिश | |
| [सुरेशभट] चाचणी | व्यवस्थापक | |
| काही दशके त्याचे.... पाल्हाळ कशासाठी | भूषण कटककर | |
| भूमिका | क्रान्ति | |
| कुठून जायचे पुढे | अजय अनंत जोशी | |
| वाढतो आहे पसारा कागदांचा.. | ज्ञानेश. | |
| तुझ्यानंतर | भूषण कटककर | |
| नारद | भूषण कटककर |