संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| नामानिराळे | संतोष कसवणकर | |
| आराम पहिल्या सारखा | निशिकांत दे | |
| नवा घाव | संतोष कसवणकर | |
| एखादा तरी... | मी अभिजीत | |
| चिडता का हो ? | निशिकांत दे | |
| जखमा जुन्या (गझल ) | मनिषा नाईक. | |
| छायेलाही त्यांच्या थोडा | निशिकांत दे | |
| निघाले अर्थ नाही ते तुझ्या वाटेत येण्याचे | विजय दि. पाटील | |
| मावळाया लागलो | निशिकांत दे | |
| पडल्यापडल्या जागोजागी उसवत आहे | विजय दि. पाटील | |
| पुन्हा केव्हातरी बोलू... | रुपेश देशमुख | |
| काय आहे तुझ्याकडे माझे | बेफिकीर | |
| ''वाटत आहे'' | कैलास | |
| अचाट तारे तोडत होता | अनिल रत्नाकर | |
| इथे माझा ॠतू आहे इथे राहू नका कोणी... | मयुरेश साने | |
| पांढरा किडा | गंगाधर मुटे | |
| म्हणालो त्यातले काहीच मी करणार नाही | विजय दि. पाटील | |
| पाऊल वळले... | अजय अनंत जोशी | |
| कुणाशी बोलता आहात याची कल्पना आहे? | बेफिकीर | |
| ''जमले'' | कैलास |