संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| अशी कशी ही बदलत गेली सर्व माणसे | अनिरुद्ध अभ्यंकर | |
| बनेल तारे.. | बहर | |
| जुळले अजून आहे | जयश्री अंबासकर | |
| सांग कोठे माणसा आहेस तू | चित्तरंजन भट | |
| चकवा | केदार पाटणकर | |
| हमी | आनंदयात्री | |
| प्रश्न आहे असा.. | ज्ञानेश. | |
| इथे प्रत्येक जण धुंदीत आहे | चित्तरंजन भट | |
| अनुमान! | प्रदीप कुलकर्णी | |
| येत नाही मी | अनिल रत्नाकर | |
| ...व्यवसाय मी | अनिल रत्नाकर | |
| असंभव | आनंदयात्री | |
| बत्तीस तारखेला | गंगाधर मुटे | |
| हुंदका ओठातला पोटात नाही | supriya.jadhav7 | |
| अस्तित्व दान केले | गंगाधर मुटे | |
| क्षण एक पुरे जगण्यास खरा | मयुरेश साने | |
| काळ | जयन्ता५२ | |
| ''मागणे'' | कैलास | |
| ''सरावाने'' | कैलास | |
| मी कुठे शोधू अता ती ओळखीची माणसे | शाम |