संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| हे फुलांचे उधान झाडांना... | वैभव देशमुख | |
| फिरून यायचे इथे टळेल का कधी? | मिल्या | |
| मला सांभाळले आहे.. | ज्ञानेश. | |
| सरहदी का शोधती मग झुंजण्याची कारणे? (तरही) | supriya.jadhav7 | |
| गात येथे तू उगा का थांबलेला | विदेश | |
| मी तुझा,तुझा असेन आमरण | कैलास | |
| जन्मभर.... | supriya.jadhav7 | |
| तुझी नजर | मिल्या | |
| आले वादळ गेले वादळ... | अनंत नांदुरकर खलिश | |
| गझल | मयुरेश साने | |
| कशासाठी कुणासाठी... | अनंत नांदुरकर खलिश | |
| हळूहळू | मयुरेश साने | |
| हा आहे खडतर रस्ता.. | शाम | |
| गाव हा आटपाट स्वप्नांचा | प्रसाद लिमये | |
| वळवळ केवळ | विसुनाना | |
| पुसणारे नसताना कोणी अश्रू ढाळायचे कशाला... | मयुरेश साने | |
| हवे हवे ते घडतच नाही, घडू नये ते घडून गेले | मयुरेश साने | |
| पसारा... | श्रीधर वैद्य | |
| माहीत नाही... | जिज्ञासा... | |
| मजकूर | आनंदयात्री |