संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| जागलेली रात... | मयुरेश साने | |
| वळता वळता | वीरेद्र बेड्से | |
| अधनंमधनं आनंदाची कडमड आहे | विजय दि. पाटील | |
| व्यर्थ जगणे ! | supriya.jadhav7 | |
| योग नाही! | क्रान्ति | |
| नाव तुझ्या ओठावर... | वैभव देशमुख | |
| दावा .. | कमलाकर देसले | |
| राखते तोल मी.....!!! | supriya.jadhav7 | |
| आयुष्य गोल आहे | मिल्या | |
| कळा लागल्या | क्रान्ति | |
| अबोला गाजला होता | मयुरेश साने | |
| सोकावलेल्या अंधाराला इशारा | गंगाधर मुटे | |
| ''सावली'' | कैलास | |
| ह्याहून मोठे अक्रीत काही घडणार नाही | विजय दि. पाटील | |
| अदृश्यच असतो क्रूस कधी | चित्तरंजन भट | |
| ''वेदना'' | कैलास | |
| हात होतो पुढे भिकार्यांचा | बेफिकीर | |
| जिथे मी पोचलो तेथे तुझे माहेर होते | बेफिकीर | |
| जे जसे आहे तसे स्वीकारतो मी शेवटी... | बेफिकीर | |
| मी प्रेम दे म्हणालो... | शाम |