संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| गझल | अनंत ढवळे | |
| वर्तुळे | विजय दि. पाटील | |
| काही नवीन सुट्टे शेरः | बेफिकीर | |
| संवेदनशिल विषयांना बाजार बनविले जाते | शुभानन चिंचकर | |
| एकटा सागरकिनारा एकटा | चित्तरंजन भट | |
| चोर | कैलास | |
| काय नभाची आहे इच्छा पाहू... | वैभव देशमुख | |
| हुंदका उरातच गोठवायचा आहे | वैभव वसंतराव कुलकर्णी | |
| नीट वाच...! | प्रदीप कुलकर्णी | |
| विषारी केव्हढे वातावरण आहे | चित्तरंजन भट | |
| "दारू" | कैलास | |
| किती? | केदार पाटणकर | |
| बोचरे वारे | विजय दि. पाटील | |
| हाक | प्रदीप कुलकर्णी | |
| पाहिले चालून त्याच्या सोबतीने | बेफिकीर | |
| आकडेवारी | केदार पाटणकर | |
| मी काही स्वप्नांच्या नुसता सोबत बसतो | प्रसाद लिमये | |
| लागला गळपफास तेव्हा तरतरी श्वासात आली! | सतीश देवपूरकर | |
| जितके जमते.. | ज्ञानेश. | |
| पुढे माणसांचे यशू-बुद्ध होते | गंगाधर मुटे |