संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| नव्या यमांची नवीन भाषा | गंगाधर मुटे | |
| मी जिथे नाही अशी जागाच नाही | बेफिकीर | |
| तू भेटली नव्हतीस तोवर | मिल्या | |
| मनात माझ्या कुठून येते बरेच काही? | विजय दि. पाटील | |
| रुढी परंपरेचा का बांधलास शेला? | विद्यानंद हाडके | |
| ............. अजून काही | विशाल कुलकर्णी | |
| लाथाडती सारे मला | अनिल रत्नाकर | |
| सोयरा | क्रान्ति | |
| लगान एकदा तरी..... (हझल?) | गंगाधर मुटे | |
| हो गझल गैरमुसलसल आता.. | बेफिकीर | |
| एकदा तरी | मिल्या | |
| कधी कधी | केदार पाटणकर | |
| जखमेस ओल आली.... | निरज कुलकर्णी | |
| आरंभ... | निरज कुलकर्णी | |
| अर्थ मौनाचे... | निरज कुलकर्णी | |
| अस्ता॑चली रवी | विकास सोहोनी | |
| कर प्रीये हॄदयाचे हाल पुन्हा एकदा | योगेश मेहरे | |
| प्रीती सखे मलाही का परवडू नये...? | विशाल कुलकर्णी | |
| माळले गजरे तयांनी वाळलेले...! | विशाल कुलकर्णी | |
| वादात या कुणीही सहसा पडू नये | क्रान्ति |