संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
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| वेड तो लावून गेला (गझल) | मनिषा नाईक. | |
| अबोली !!! | supriya.jadhav7 | |
| म्हटले होते | क्रान्ति | |
| ' कहाणी...'( गझल ) | mamata.riyaj@gmail.com | |
| पहा दिशाही रुसून बसल्या तुझ्यासारख्या. | सोनाली जोशी | |
| दु:ख सुद्धा माणसे पाहून येते | मिल्या | |
| ''जीवन अंधारातच आहे'' | कैलास | |
| ना दिवाळी पाहिली या लक्तराने !!! | supriya.jadhav7 | |
| मी एकटीच येथे!!!(गझल). | supriya.jadhav7 | |
| चेहरा दे कोणताही बाटतो का आरसा ? ........... | मयुरेश साने | |
| ही घडी दे !!! | supriya.jadhav7 | |
| एक होऊ या क्षणी | केदार पाटणकर | |
| रात्र झाली फ़ार आता !!! | supriya.jadhav7 | |
| सांत्वन...( गझल ) | mamata.riyaj@gmail.com | |
| सांगू कसे...?(गझल) | mamata.riyaj@gmail.com | |
| चुंबिण्या येऊ नको तू | मयुरेश साने | |
| देत जा... | कमलाकर देसले | |
| फीतूर .... | कविता मोकाशी | |
| शेवटाला चार नाही(त) !!! | supriya.jadhav7 | |
| का....?(गझल) | mamata.riyaj@gmail.com |