संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| आपला स॑वाद... | वैभव देशमुख | |
| शब्द होते, तरी.. | ज्ञानेश. | |
| सुकावे लागले | क्रान्ति | |
| भिकार सावकार | बेफिकीर | |
| मरणानंतर | अनिल रत्नाकर | |
| कवडसे | मधुघट | |
| पूर्वीगत पण आता काही लिहिवत नाही | अनिरुद्ध अभ्यंकर | |
| श्वास | अनिल रत्नाकर | |
| स्वार्थ | बेफिकीर | |
| ईमान | काव्यरसिक | |
| मुद्दाम भुलवणारे | जयन्ता५२ | |
| बुद्ध बाटला आहे | बेफिकीर | |
| अनोळखी होऊन जगावे.... | जनार्दन केशव म्हात्रे | |
| रिती पोकळी | क्रान्ति | |
| भग्न : मधुघट | मधुघट | |
| शोध ज्याचा घेतला तो..(अनुवाद) : केदार पाटणकर | केदार पाटणकर | |
| जबरदस्तीचा कवी मी, गझल माझी जुळवलेली | बेफिकीर | |
| माकडे ही | अनिल रत्नाकर | |
| पांघरूनी वेड वावरणे बरे की | बेफिकीर | |
| शेवट | चक्रपाणि |