संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| नकोसे वाटते | क्रान्ति | |
| रात्र पुन्हा परीकथा रंगवेल | प्रसाद लिमये | |
| पादुका | मिल्या | |
| गंधीत रात आहे | बेफिकीर | |
| लिहायचे ते लिहून टाकू | बेफिकीर | |
| ...जमेल तेंव्हा | जयन्ता५२ | |
| केवळ तुझी होऊन झंकारायचे | सोनाली जोशी | |
| अभंग १ | व्यवस्थापक | |
| मागचे जाती पुढे | अजय अनंत जोशी | |
| 'अॅबनॉर्मल पाखरू' | बेफिकीर | |
| 'जग मल्लीकाचे आहे' - कवी ज्ञानेशची फर्माईश! | गंभीर समीक्षा | |
| का हवी असतात तेव्हा नेमकी रुसतात नाती? | बेफिकीर | |
| ते पाखरू दिवाणे | जयन्ता५२ | |
| यातूनच माझे दैव सदा घडलेले | बेफिकीर | |
| अलिप्तता | ऋत्विक फाटक | |
| मनाला | क्रान्ति | |
| ----पुन्हा का---- | नेहा | |
| नको फिरून बोलणे नकोच आज भेटणे | सोनाली जोशी | |
| मी मोरपीस व्हावे - | विदेश | |
| ----नसते आशा जीवनाची---- | नेहा |