संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
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| कोलाहलात सार्या कोणी अबोल आहे | अविनाश ओगले | |
| जीवनाशी जुंपली | rind | |
| हात तुझा हातात | अगस्ती | |
| तुझ्या नि माझ्या भेटीचे युग... | जनार्दन केशव म्हात्रे | |
| सांगती खोटे जरी | rind | |
| काय फायदा? | मिल्या | |
| ठेवला दडपून ज्यांनी... | गौरवकुमार आठवले | |
| कमाई.... | अभिषेक उदावंत | |
| गर्दी... | अजब | |
| रंज की जब गुफ्तगू होने लगी.. मराठी अविष्करण. | अविनाश ओगले | |
| कुणीच नव्हते आले निरोप देण्यासाठी ... | अनंत ढवळे | |
| तुला या शोधती तारा | rind | |
| रंग नभाचे... | जनार्दन केशव म्हात्रे | |
| व्यासही माझ्यात...मी व्यासात आहे...! | प्रदीप कुलकर्णी | |
| बांधुन मी... | जनार्दन केशव म्हात्रे | |
| पोरी.... | अमित वाघ | |
| श्वास | पुलस्ति | |
| तसा कुणाला... | अजब | |
| कालचा प्रवास पुन्हा | rind | |
| सूर माझे | rind |