संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
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| मला तुझ्या धर्माची भीती | अनंत ढवळे | |
| फिरुन कातरवेळ येता पापणी ओलावते.. | मानस६ | |
| सोपे नसते | कुमार जावडेकर | |
| आहे उसंत कोठे | अनिरुद्ध अभ्यंकर | |
| प्रश्न ऐसे.. | जयन्ता५२ | |
| ...मित्रा | संतोष कुलकर्णी | |
| शब्द | संतोष कुलकर्णी | |
| भान माझे... (अजब) | अजब | |
| कसे जगावे...? | संतोष कुलकर्णी | |
| एक वेडी वेदनेची जात आहे. | मानस६ | |
| ..आता नको ! | प्रदीप कुलकर्णी | |
| ...कवितेने दिले ! | प्रदीप कुलकर्णी | |
| घावामागून घाव घातले त्याबद्दल आभार.. | मानस६ | |
| मंतरलेल्या सायंकाळी | संतोष कुलकर्णी | |
| आजही अप्रूप वाटे | संतोष कुलकर्णी | |
| दुःखाने कुठल्या समुद्र इतका हेलावतो सारखा ? | चित्तरंजन भट | |
| वेळी अवेळी | जयन्ता५२ | |
| कुठे म्हणालो?... (अजब) | अजब | |
| ...कोण मी तुझा ? | प्रदीप कुलकर्णी | |
| फुलांना जर असे | प्रमोद बेजकर |