संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| ...आहेस कुठे तू ? | प्रदीप कुलकर्णी | |
| निराधार | सोनाली जोशी | |
| स्वीकारले | केदार पाटणकर | |
| हे खरे ना? | विसुनाना | |
| दे | साकार | |
| बोलण्याने बोलणे वाढेल आता | चित्तरंजन भट | |
| ...नकोशा रात्री ! | प्रदीप कुलकर्णी | |
| अजूनही | केदार पाटणकर | |
| कसा करावा या भयगंडाचा निचरा | अनंत ढवळे | |
| घोळ | जयन्ता५२ | |
| आनंदाने | चित्तरंजन भट | |
| ...देऊ नये ! | प्रदीप कुलकर्णी | |
| ताटाखालची मांजरे | नितीन | |
| 'आहे 'खरेच का मी ..(एक नवीन शेर) | संतोष कुलकर्णी | |
| तसा वेदनेला ही मी आवडलो नाही | अनिरुद्ध अभ्यंकर | |
| खंत | विसुनाना | |
| 'आहॅ 'खरेच का मी ... | संतोष कुलकर्णी | |
| ...काय करू मी ? | प्रदीप कुलकर्णी | |
| असे प्रेम देवा | साकार | |
| मिळेल का दोन घोट पाणी..... | अनंत ढवळे |