संकेतस्थळावर प्रकाशित झालेल्या गझला
| शीर्षक | लेखक | प्रकाशन दिनांक |
|---|---|---|
| भूल | चक्रपाणि | |
| ही झाडे पेटवली कोणी....... | वैभव देशमुख | |
| रात्रभर | पुलस्ति | |
| ..अभंग | ज्ञानेश. | |
| आठवणीला येई डुलकी...! | प्रदीप कुलकर्णी | |
| कसा आज अंधारही सोसवेना | प्रसाद लिमये | |
| ...चुकले असावे | जयन्ता५२ | |
| ...विचार एखादा | वैभव जोशी | |
| त्या कळीची रानवेड्या पाखराशी भेट झाली | सोनाली जोशी | |
| पसारा ! | प्रदीप कुलकर्णी | |
| कुठेच आता सवाल नाही | संतोष बडगुजर | |
| सवे या.. | केदार पाटणकर | |
| उस्ताद | ॐकार | |
| ...मी नवा-निराळा आशय ! | प्रदीप कुलकर्णी | |
| तू दिलेली सोडचिट्ठी... | ज्ञानेश. | |
| चंदन | पुलस्ति | |
| हा प्रवास आधी मुळीच ठरला नव्हता | चित्तरंजन भट | |
| सांगतो प्रत्येक जण गर्दीतला..... | अनंत ढवळे | |
| 'गझल अंतीम भूषणची.....' | भूषण कटककर | |
| सखे ठोठावते आहेस कुठले दार देहाचे? | ॐकार |